रविवार, 6 सितंबर 2026

दूरी तुमने तय की थी



दूरी तुमने तय की थी


मैं आज भी

तुमसे उतनी ही दूर हूँ,

जितनी दूर

तुमने मुझे रखा था।


मन ने कई बार कहा

चल, दो कदम पास चलें,

मगर तुम्हारी ख़ामोशी ने

हर बार रास्ता रोक लिया।


फिर मैंने भी

न पास आने की ज़िद की,

न दूर जाने का बहाना बनाया,

बस वहीं ठहरा रहा,

जहाँ तुम्हारा अपनापन ख़त्म हुआ

और मेरा इंतज़ार शुरू।


तुमने हमारे दरमियाँ

जितना फ़ासला रखा,

मैंने उतनी ही जगह

तुम्हारे लिए छोड़ दी


बिना सवाल,

बिना शोर,

बिना तुम्हें दोष दिए।


हाँ, शिकायत बस इतनी सी है

इस दूरी का इल्ज़ाम

मेरी ख़ामोशी पर मत रखना।


मैं पीछे नहीं हटा था,

मैं तो बस

तुम्हारे तय किए हुए फ़ासले का

सम्मान कर रहा था।


कभी लौटना चाहो

तो रास्ता वहीं मिलेगा

क्योंकि दूरी

तुमने तय की थी,

मगर इंतज़ार…

आज भी मेरा है।


~ ©️प्रेमित ०६/०९/२६

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