रविवार, 26 अप्रैल 2020
My Silver lining during Covid-19 Pandemic
शुक्रवार, 3 जनवरी 2020
काम किये जा रहा हूँ
बहुत दिनों के बाद कुछ लिख पाया! आपलोगों के सुझाव के लिए प्रस्तुत! 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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आराम कर सकूँ कुछ पल इसलिए काम किये जा रहा हूँ।
आराम कर सकूँ कुछ पल इसलिए काम किये जा रहा हूँ।
मंगलवार, 29 जनवरी 2019
शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018
The Year
शनिवार, 23 अगस्त 2014
मेरे पापा!!
शनिवार, 8 मार्च 2014
मशाल....
(मेरी डायरी के 2007 नारी दिवस के पन्ने से)
मशाल....
होतें हैं एक व्यक्ति के कई रूप
एक छोड़कर अक्सर सभी डरावने कुरूप
मानव में ही दानव भी होते हैं
पर नारी शायद ही दानवी होती है....
एक ही नारी कई रूपों में निभाती है सारी जिम्मेवारी
नारी के सारे रूप होते हैं विलक्षण मनोहारी
शक्ति है नारी की अपार
सिर्फ नारी ही कर सकती है जीवन निर्माण....
हमेशा हुआ है नारी का निरादर
इसलिये है समाज आज बदतर....
पहचान ली है उसने अपनी शक्ति अपार
नही रहेगी अब वो अबला बनकर
उठने दो ऊनको समाज की रीढ़ बनकर
कल्पणा, किरण, सानिया, बढ़ने दो इन्हें
मत रोको इनको, यें ही हैं मशााल
जो करेंगी भविष्य उज्जवल....
शुक्रिया अपार सहन शक्ति का
जिसने सहा है न जाने क्या क्या
पर जिस दिन टूट गया ये बाँध
सोंचों, कहँा बह जाएगें हम़़़़....
करो सम्मान नारी का
यही है समाधान सारी समस्याओं का
क्योंकी कर दिया है नारी ने साबित
की नारी है सचमुच महाऩ़़़...
--- प्रेमित (c) 8th March 2014 (on International Women's Day - Thanking all the women)
।।।नारी ईक्कीसा।।।
सोमवार, 6 जनवरी 2014
रूह की आस
रूह की आस
वो बेगाने होकर लाड़ जताते है।
उन्हे क्या पता बेगानों से दिल नही लगाते है।।
नाम लेने से हो जाते हैं बदनाम।
बेनामी जीने का भी अपना ही नशा है।।
दूसरों की फ़िक्र में जिंदगी गुज़ारी।
कब कहाँ हमने अपनी रूह को छुआ है।।
--- प्रेमित (c) 6th Jan 2014
शनिवार, 21 दिसंबर 2013
माँ
सोमवार, 18 नवंबर 2013
अकेले का मेला
रविवार, 24 मार्च 2013
भारतीयता - Just thought today in Holi Milan Samaroh
विदेश में आकर ज्यादा देशी हो जाते हैं,
लोगों को भारतीयता सीखाते हैं।
थूकते थे पान की पीक सड़क पे हम भी,
विदेश में मुॅह मे ही गटक जाते हैं।
खेलते हैं होली यहां भी जमकर रंगों से,
पर वो देश का रंग कहा ला पाते हैं।
विदेश में आकर ज्यादा देशी हो जाते हैं,
लोगों को भारतीयता सीखाते हैं।
--- प्रेमित (c) 24th March 2013, Holi Milan BIJHAR, 2013
शनिवार, 16 मार्च 2013
प्रवासी....
ज़ो देखा हर ओर, हर चेहरा बेगाना सा लगा ।
घर से दूर घर बनाना, हमेशा बंजारो सा लगा,
लाख कर ली वफाऐ़ं, हर लम्हा मगर पराया सा लगा।
तड़प रहा हूँ, आकर तेरी आगोश में सर छुपाने को,
चला जिस रस्ते ताउम्र, वापसी उसपे अनजाना सा लगा।
ना वो जमीं ना वो आसमां, चमचमाती भीड़ का कारवां,
दफ़न ना करना यहां मुझे, रूह भी अपना बेगाना सा लगा।
--- प्रेमित (c) 16th March 2013
सोमवार, 25 फ़रवरी 2013
मर्म कविता का
अगर हो समझना मर्म कविता का
जब भी पढ़ना, मन लगाकर पढ़ना
अपनी कविता मानकर तुम कविता पढ़ना
क्यूंकि कवि कहता है सदा ही
कहानी दूसरों की अपनी ही जबानी
इसलिए गर हो समझना कवि को
खुद को कवि बनाकर, तुम कविता पढ़ना...
शनिवार, 12 मई 2012
निशब्द - शब्द
शब्द ना मिले तो क्या कहु
जिन्दगी तमाम शब्दों के हवाले,
पर क्या है मेरी जिन्दगी के शब्द
जो बयां करे मेरी जिंदगानी.
ना रोटी कपड़ा ना मकान
ना दवा दारू ना दूकान,
भागता हूँ इन शब्दों के पीछे
पर ये मेरी जिन्दगी के शब्द नहीं.
शब्द करते हैं बयां
विचार सुविचार या दुर्विचार,
लेकिन मेरी तेरी जिंदगानी,
होती है बिना शब्दों के बयां
निशब्द नहीं है पर ये
है हमारे भी शब्द,
प्रेरणा अमित मिल प्रेमित भये
अवि करे बयां जिंदगानी.
ये शब्द सिर्फ तुम्हारे लिए .... प्राणु.....
--- प्रेमित (c) 12th May 2012. — with Prerna Sahay at Blk 637 Yishun St 61.












